याचक और दाता

अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती…
.
और नम्रता से कहती- बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए।
.
वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रध्दालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था।
.
आने-जाने वाले दो-चार पैसे उसके हाथ पर रख ही देते। अन्धी उनको दुआएं देती और उनको सहृदयता को सराहती।
.
स्त्रियां भी उसके पल्ले में थोड़ा-बहुत अनाज डाल जाया करती थीं।
.
प्रात: से संध्या तक वह इसी प्रकार हाथ फैलाए खड़ी रहती। उसके पश्चात् मन-ही-मन भगवान को प्रणाम करती और अपनी लाठी के सहारे झोंपड़ी का पथ ग्रहण करती।
.
उसकी झोंपड़ी नगर से बाहर थी। रास्ते में भी याचना करती जाती किन्तु राहगीरों में अधिक संख्या श्वेत वस्त्रों वालों की होती,
.
जो पैसे देने की अपेक्षा झिड़कियां दिया करते हैं। तब भी अन्धी निराश न होती और उसकी याचना बराबर जारी रहती।
.
झोंपड़ी तक पहुंचते-पहुंचते उसे दो-चार पैसे और मिल जाते।
.
झोंपड़ी के समीप पहुंचते ही एक दस वर्ष का लड़का उछलता-कूदता आता और उससे चिपट जाता। अन्धी टटोलकर उसके मस्तक को चूमती।
.
बच्चा कौन है ? किसका है ? कहां से आया ? इस बात से कोई परिचय नहीं था।
.
पांच वर्ष हुए पास-पड़ोस वालों ने उसे अकेला देखा था।
.
इन्हीं दिनों एक दिन संध्या-समय लोगों ने उसकी गोद में एक बच्चा देखा, वह रो रहा था, अन्धी उसका मुख चूम-चूमकर उसे चुप कराने का प्रयत्न कर रही थी।
.
वह कोई असाधारण घटना न थी, अत: किसी ने भी न पूछा कि बच्चा किसका है।
.
उसी दिन से यह बच्चा अन्धी के पास था और प्रसन्न था। उसको वह अपने से अच्छा खिलाती और पहनाती।
.
अन्धी ने अपनी झोंपड़ी में एक हांडी गाड़ रखी थी। संध्या-समय जो कुछ मांगकर लाती उसमें डाल देती और उसे किसी वस्तु से ढांप देती।
.
इसलिए कि दूसरे व्यक्तियों की दृष्टि उस पर न पड़े।
.
खाने के लिए अन्न काफी मिल जाता था। उससे काम चलाती। पहले बच्चे को पेट भरकर खिलाती फिर स्वयं खाती।
.
रात को बच्चे को अपने वक्ष से लगाकर वहीं पड़ रहती। प्रात:काल होते ही उसको खिला-पिलाकर फिर मन्दिर के द्वार पर जा खड़ी होती।
.
काशी में सेठ बनारसीदास बहुत प्रसिध्द व्यक्ति हैं। बच्चा-बच्चा उनकी कोठी से परिचित है।
.
बहुत बड़े देशभक्त और धर्मात्मा हैं। धर्म में उनकी बड़ी रुचि है।
.
दिन के बारह बजे तक सेठ स्नान-ध्यान में संलग्न रहते। कोठी पर हर समय भीड़ लगी रहती।
.
कर्ज के इच्छुक तो आते ही थे, परन्तु ऐसे व्यक्तियों का भी तांता बंधा रहता जो अपनी पूंजी सेठजी के पास धरोहर रूप में रखने आते थे।
.
सैकड़ों भिखारी अपनी जमा-पूंजी इन्हीं सेठजी के पास जमा कर जाते।
.
अन्धी को भी यह बात ज्ञात थी, किन्तु पता नहीं अब तक वह अपनी कमाई यहां जमा कराने में क्यों हिचकिचाती रही।
.
उसके पास काफी रुपये हो गए थे, हांडी लगभग पूरी भर गई थी। उसको शंका थी कि कोई चुरा न ले।
.
एक दिन संध्या-समय अन्धी ने वह हांडी उखाड़ी और अपने फटे हुए आंचल में छिपाकर सेठजी की कोठी पर पहुंची।
.
सेठजी बही-खाते के पृष्ठ उलट रहे थे, उन्होंने पूछा- क्या है बुढ़ियाb?
.
अंधी ने हांडी उनके आगे सरका दी और डरते-डरते कहा- सेठजी, इसे अपने पास जमा कर लो, मैं अंधी, अपाहिज कहां रखती फिरूंगी ?
.
सेठजी ने हांडी की ओर देखकर कहा-इसमें क्या है ?
.
अन्धी ने उत्तर दिया- भीख मांग-मांगकर अपने बच्चे के लिए दो-चार पैसे संग्रह किये हैं, अपने पास रखते डरती हूं, कृपया इन्हें आप अपनी कोठी में रख लें।
.
सेठजी ने मुनीम की ओर संकेत करते हुए कहा- बही में जमा कर लो।
.
फिर बुढ़िया से पूछा-तेरा नाम क्या है?
अंधी ने अपना नाम बताया, मुनीमजी ने नकदी गिनकर उसके नाम से जमा कर ली
.
और वह सेठजी को आशीर्वाद देती हुई अपनी झोंपड़ी में चली गई।
.
दो वर्ष बहुत सुख के साथ बीते। इसके पश्चात् एक दिन लड़के को ज्वर ने आ दबाया।
.
अंधी ने दवा-दारू की, झाड़-फूंक से भी काम लिया, टोने-टोटके की परीक्षा की, परन्तु सम्पूर्ण प्रयत्न व्यर्थ सिध्द हुए।
.
लड़के की दशा दिन-प्रतिदिन बुरी होती गई, अंधी का हृदय टूट गया, साहस ने जवाब दे दिया, निराश हो गई।
.
परन्तु फिर ध्यान आया कि संभवत: डॉक्टर के इलाज से फायदा हो जाए। इस विचार के आते ही वह गिरती-पड़ती सेठजी की कोठी पर आ पहुंची।
.
सेठजी उपस्थित थे। अंधी ने कहा- सेठजी मेरी जमा-पूंजी में से दस-पांच रुपये मुझे मिल जायें तो बड़ी कृपा हो।
.
मेरा बच्चा मर रहा है, डॉक्टर को दिखाऊंगी।
.
सेठजी ने कठोर स्वर में कहा- कैसी जमा पूंजी ? कैसे रुपये ? मेरे पास किसी के रुपये जमा नहीं हैं।
.
अंधी ने रोते हुए उत्तर दिया- दो वर्ष हुए मैं आपके पास धरोहर रख गई थी। दे दीजिए बड़ी दया होगी।
.
सेठजी ने मुनीम की ओर रहस्यमयी दृष्टि से देखते हुए कहा- मुनीमजी, जरा देखना तो, इसके नाम की कोई पूंजी जमा है क्या ? तेरा नाम क्या है री ?
.
अंधी की जान-में-जान आई, आशा बंधी। पहला उत्तर सुनकर उसने सोचा कि सेठ बेईमान है, किन्तु अब सोचने लगी सम्भवत: उसे ध्यान न रहा होगा।
.
ऐसा धर्मी व्यक्ति भी भला कहीं झूठ बोल सकता है। उसने अपना नाम बता दिया।
.
उलट-पलटकर देखा। फिर कहा- नहीं तो, इस नाम पर एक पाई भी जमा नहीं है।
.
अंधी वहीं जमी बैठी रही। उसने रो-रोकर कहा- सेठजी, परमात्मा के नाम पर, धर्म के नाम पर, कुछ दे दीजिए।
.
मेरा बच्चा जी जाएगा। मैं जीवन-भर आपके गुण गाऊंगी।
.
परन्तु पत्थर में जोंक न लगी। सेठजी ने क्रुध्द होकर उत्तर दिया- जाती है या नौकर को बुलाऊं।
.
अंधी लाठी टेककर खड़ी हो गई और सेठजी की ओर मुंह करके बोली-
.
अच्छा भगवान तुम्हें बहुत दे। और अपनी झोंपड़ी की ओर चल दी।
.
यह अशीष न था बल्कि एक दुखी का शाप था।
.
बच्चे की दशा बिगड़ती गई, दवा-दारू हुई ही नहीं, फायदा क्यों कर होता।
.
एक दिन उसकी अवस्था चिन्ताजनक हो गई, प्राणों के लाले पड़ गये, उसके जीवन से अंधी भी निराश हो गई।
.
सेठजी पर रह-रहकर उसे क्रोध आता था। इतना धनी व्यक्ति है, दो-चार रुपये दे देता तो क्या चला जाता और फिर मैं उससे कुछ दान नहीं मांग रही थी…
.
अपने ही रुपये मांगने गई थी। सेठजी से घृणा हो गई।
.
बैठे-बैठे उसको कुछ ध्यान आया। उसने बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया और ठोकरें खाती, गिरती-पड़ती, सेठजी के पास पहुंची और उनके द्वार पर धरना देकर बैठ गई।
.
बच्चे का शरीर ज्वर से भभक रहा था और अंधी का कलेजा भी।
.
एक नौकर किसी काम से बाहर आया। अंधी को बैठा देखकर उसने सेठजी को सूचना दी, सेठजी ने आज्ञा दी कि उसे भगा दो।
.
नौकर ने अंधी से चले जाने को कहा, किन्तु वह उस स्थान से न हिली। मारने का भय दिखाया, पर वह टस-से-मस न हुई।
.
उसने फिर अन्दर जाकर कहा कि वह नहीं टलती।
.
सेठजी स्वयं बाहर पधारे। देखते ही पहचान गये। बच्चे को देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ कि उसकी शक्ल-सूरत उनके मोहन से बहुत मिलती-जुलती है।
.
सात वर्ष हुए तब मोहन किसी मेले में खो गया था। उसकी बहुत खोज की, पर उसका कोई पता न मिला।
.
उन्हें स्मरण हो आया कि मोहन की जांघ पर एक लाल रंग का चिन्ह था। इस विचार के आते ही उन्होंने अंधी की गोद के बच्चे की जांघ देखी।
.
चिन्ह अवश्य था परन्तु पहले से कुछ बड़ा। उनको विश्वास हो गया कि बच्चा उन्हीं का है।
.
परन्तु तुरन्त उसको छीनकर अपने कलेजे से चिपटा लिया।
.
शरीर ज्वर से तप रहा था। नौकर को डॉक्टर लाने के लिए भेजा और स्वयं मकान के अन्दर चल दिये।
.
अंधी खड़ी हो गई और चिल्लाने लगी-मेरे बच्चे को न ले जाओ, मेरे रुपये तो हजम कर गये अब क्या मेरा बच्चा भी मुझसे छीनोगे ?
.
सेठजी बहुत चिन्तित हुए और कहा-बच्चा मेरा है, यही एक बच्चा है, सात वर्ष पूर्व कहीं खो गया था अब मिला है..
.
सो इसे कहीं नहीं जाने दूंगा और लाख यत्न करके भी इसके प्राण बचाऊंगा।
.
अंधी ने एक जोर का ठहाका लगाया-तुम्हारा बच्चा है, इसलिए लाख यत्न करके भी उसे बचाओगे।
.
मेरा बच्चा होता तो उसे मर जाने देते, क्यों ? यह भी कोई न्याय है ?
.
इतने दिनों तक खून-पसीना एक करके उसको पाला है। मैं उसको अपने हाथ से नहीं जाने दूंगी।
.
सेठजी की अजीब दशा थी। कुछ करते-धरते बन नहीं पड़ता था। कुछ देर वहीं मौन खड़े रहे फिर मकान के अन्दर चले गये।
.
अन्धी कुछ समय तक खड़ी रोती रही फिर वह भी अपनी झोंपड़ी की ओर चल दी।
.
दूसरे दिन प्रात:काल प्रभु की कृपा हुई या दवा ने जादू का-सा प्रभाव दिखाया। मोहन का ज्वर उतर गया।
.
होश आने पर उसने आंख खोली तो सर्वप्रथम शब्द उसकी जबान से निकला, मां।
.
चहुंओर अपरिचित शक्लें देखकर उसने अपने नेत्र फिर बन्द कर लिये। उस समय से उसका ज्वर फिर अधिक होना आरम्भ हो गया।
.
मां-मां की रट लगी हुई थी, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, सेठजी के हाथ-पांव फूल गये, चहुंओर अंधेरा दिखाई पड़ने लगा।
.
क्या करूं एक ही बच्चा है, इतने दिनों बाद मिला भी तो मृत्यु उसको अपने चंगुल में दबा रही है, इसे कैसे बचाऊं ?
.
सहसा उनको अन्धी का ध्यान आया। पत्नी को बाहर भेजा कि देखो कहीं वह अब तक द्वार पर न बैठी हो।
.
परन्तु वह वहां कहां ? सेठजी ने फिटन तैयार कराई और बस्ती से बाहर उसकी झोंपड़ी पर पहुँचे।
.
झोंपड़ी बिना द्वार के थी, अन्दर गए। देखा अन्धी एक फटे-पुराने टाट पर पड़ी है और उसके नेत्रों से अश्रुधर बह रही है।
.
सेठजी ने धीरे से उसको हिलाया। उसका शरीर भी अग्नि की भांति तप रहा था।
.
सेठजी ने कहा- बुढ़िया ! तेरा बच्च मर रहा है, डॉक्टर निराश हो गए, रह-रहकर वह तुझे पुकारता है।
.
अब तू ही उसके प्राण बचा सकती है। चल और मेरे…नहीं-नहीं अपने बच्चे की जान बचा ले।
.
अन्धी ने उत्तर दिया- मरता है तो मरने दो, मैं भी मर रही हूं। हम दोनों स्वर्ग-लोक में फिर मां-बेटे की तरह मिल जाएंगे।
.
इस लोक में सुख नहीं है, वहां मेरा बच्चा सुख में रहेगा। मैं वहां उसकी सुचारू रूप से सेवा-सुश्रूषा करूंगी।
.
सेठजी रो दिये। आज तक उन्होंने किसी के सामने सिर न झुकाया था। किन्तु इस समय अन्धी के पांवों पर गिर पड़े और रो-रोकर कहा- ममता की लाज रख लो,
.
आखिर तुम भी उसकी मां हो। चलो, तुम्हारे जाने से वह बच जायेगा।
.
ममता शब्द ने अन्धी को विकल कर दिया। उसने तुरन्त कहा- अच्छा चलो।
.
सेठजी सहारा देकर उसे बाहर लाये और फिटन पर बिठा दिया। फिटन घर की ओर दौड़ने लगी।
.
उस समय सेठजी और अन्धी भिखारिन दोनों की एक ही दशा थी। दोनों की यही इच्छा थी कि शीघ्र-से-शीघ्र अपने बच्चे के पास पहुंच जायें।
.
कोठी आ गई, सेठजी ने सहारा देकर अन्धी को उतारा और अन्दर ले गए। भीतर जाकर अन्धी ने मोहन के माथे पर हाथ फेरा।
.
मोहन पहचान गया कि यह उसकी मां का हाथ है। उसने तुरन्त नेत्र खोल दिये और उसे अपने समीप खड़े हुए देखकर कहा- मां, तुम आ गईं।
.
अन्धी भिखारिन मोहन के सिरहाने बैठ गई और उसने मोहन का सिर अपने गोद में रख लिया।
.
उसको बहुत सुख अनुभव हुआ और वह उसकी गोद में तुरन्त सो गया।
.
दूसरे दिन से मोहन की दशा अच्छी होने लगी और दस-पन्द्रह दिन में वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया।
.
जो काम हकीमों के जोशान्दे, वैद्यों की पुड़िया और डॉक्टरों के मिक्सचर न कर सके वह अन्धी की स्नेहमयी सेवा ने पूरा कर दिया।
.
मोहन के पूरी तरह स्वथ हो जाने पर अन्धी ने विदा मांगी।
.
सेठजी ने बहुत-कुछ कहा-सुना कि वह उन्हीं के पास रह जाए परन्तु वह सहमत न हुई, विवश होकर विदा करना पड़ा।
.
जब वह चलने लगी तो सेठजी ने रुपयों की एक थैली उसके हाथ में दे दी। अन्धी ने मालूम किया, इसमें क्या है।
.
सेठजी ने कहा-इसमें तुम्हारे धरोहर है, तुम्हारे रुपये। मेरा वह अपराध अन्धी ने बात काट कर कहा-यह रुपये तो मैंने तुम्हारे मोहन के लिए संग्रह किये थे, उसी को दे देना।
.
अन्धी ने थैली वहीं छोड़ दी। और लाठी टेकती हुई चल दी।
.
बाहर निकलकर फिर उसने उस घर की ओर नेत्र उठाये उसके नेत्रों से अश्रु बह रहे थे किन्तु वह एक भिखारिन होते हुए भी सेठ से महान थी।
.
इस समय सेठ याचक था और वह दाता थी।

दान की महिमा

बहुत समय पहले एक राजा था। वह अपनी न्यायप्रियता के कारण प्रजा में बहुत लोकप्रिय था।
.
एक बार वह अपने दरबार में बैठा ही था कि अचानक उसके दिमाग में एक सवाल उभरा।
.
सवाल था कि मनुष्य का मरने के बाद क्या होता होगा ? इस अज्ञात सवाल के उत्तर को पाने के लिए उस राजा ने अपने दरबार में सभी मंत्रियों आदि से मशवरा किया।
.
सभी लोग राजा की इस जिज्ञासा भरी समस्या से चिंतित हो उठे।
.
काफी देर सोचने विचारने के बाद राजा ने यह निर्णय लिया कि मेरे सारे राज्य में यह ढिंढोरा पिटवा दिया जाए…
.
कि जो आदमी कब्र में मुरदे के समान लेटकर रात भर कब्र में मरने के बाद होने वाली सभी क्रियाओं का हवाला देगा, उसे पांच सौ सोने की मोहरें भेंट दी जाएंगी।
.
राजा के आदेशानुसार सारे राज्य में उक्त ढिंढोरा पिटवा दिया गया।
.
अब समस्या आई कि अच्छा भला जीवित कौन व्यक्ति मरने को तैयार हो ?
.
आखिरकार सारे राज्य में एक ऐसा व्यक्ति इस काम को करने के लिए तैयार हो गया, जो इतना कंजूस था कि वह सुख से खाता पीता, सोता नहीं था।
.
उसको राजा के पास पेश किया गया।
.
राजा के आदेशानुसार उसके लिए बढ़िया फूलों से सुसज्जित अर्थी बनाई गई।
.
उसको उस पर लिटाकर बाकयदा श्वेत कफन से ढक दिया गया और उसे कब्रिस्तान ले जाया गया।
.
घर से जाने पर रास्ते में एक फकीर ने उसका पीछा किया और उससे कहा कि अब तो तुम मरने जा रहे हो, घर में तुम अकेले हो।
.
इतना धन तुम्हारे घर में ही कैद पड़ा रहेगा, मुझे कुछ दे दो।
.
कंजूस के बार बार मना करने पर भी फकीर ने कंजूस का पीछा नहीं छोड़ा और बरबार कुछ मांगने की रट लगाए रहा।
.
कंजूस जब एकदम परेशान हो गया तो उसने कब्रिस्तान में पड़े बादाम के छिलकों के एक ढेर में से मुट्ठी भर छिलके उठाए और उस फकीर को दे दिए।
.
बाद में कंजूस को एक कब्र में लिटा दिया गया और ऊपर से पूरी कब्र बंद कर दी गई।
.
बस एक छोटा से छेद सिर की तरफ इस आशा के साथ कर दिया गया कि यह इससे सांस लेता रहे…
.
और अगली सुबह राजा को मरने के बाद का पूरा हाल सुनाए।
.
सभी लोग कंजूस को उस कब्र में लिटाकर चले गए। रात हुई।
.
रात होने पर एक सांप कब्र पर आया और छेद देखकर उसमें घुसने का प्रयत्न करने लगा।
.
यह देखकर कब्र में लेटे कंजूस की घबराहट का ठिकाना न रहा।
.
सांप ने जैसे ही घुसने का प्रयत्न किया तो उस छेद में बादाम के छिलके आड़ बनकर आ गए।
.
सुबह होते ही राजा के सभी नौकर बड़ी जिज्ञासा के साथ कब्रिस्तान आए और जल्दी ही कब्र को खोदकर कंजूस को निकाला।
.
मरने के बाद क्या होता है, यह हाल सुनाने के लिए कंजूस को राजा के पास चलने को कहा।
.
कंजूस ने राजा के नौकरों की बात को थोड़ा भी नहीं सुना।
.
वह पहले अपने घर गया और अपनी तमाम धन संपत्ति को गरीबों में बांट दिया।
.
सब लोग कंजूस की अचानक दान करने की इस दयालुता को देखकर हैरान में पड़ गए।
.
उनके मन में कई सवाल उठने लगे।
.
अंत में कंजूस को राज दरबार में पूरा हाल सुनाने के लिए राजा के सामने पेश किया गया।
.
कंजूस ने बीती रात, सांप व बादाम के छिलकों के संघर्ष की पूरी कहानी कह सुनाई और कहा…
.
”महाराज, मरने के बाद सबसे ज्यादा दान ही काम आता है, अतः दान करना ही सब धर्मों से श्रेष्ठ है।“

अनूठी भक्ति :-क्या महाभारत युद्ध के बाद भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन द्वारिका गए

महाभारत युद्ध के बाद भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन द्वारिका गए. इस बार रथ अर्जुन चलाकर ले गए. . द्वारिका पहुंचकर अर्जुन बहुत थक गए थे इसलिए विश्राम करने अतिथिभवन में चले गए. . संध्या को रूक्मिणीजी ने श्रीकृष्ण को भोजन परोसा. प्रभु रूक्मिणीजी से बोले- प्रिय घर में अतिथि आए हुए हैं. हम अतिथि को भोजन कराए बिना भोजन कैसे ग्रहण कर लूं. . रूक्मिणीजी ने कहा- भगवन् आप भोजन आरंभ तो करिए मैं अर्जुन को अभी बुलाकर लिए आती हूं. . रूक्मिणीजी जब अतिथिकक्ष में पहुंची तो वहां अर्जुन गहरी नींद में सो रहे थे. रूक्मिणीजी यह देखकर आश्चर्य में थीं कि नींद में सोए अर्जुन के रोम-रोम से श्रीकृष्ण नाम की ध्वनि निकल रही है. . यह देख रूक्मिणी अर्जुन को जगाना भूल आनंद में डूब गईं और धीमे-धीमे ताली बजाने लगीं. . प्रभु के दर्शन के लिए नारदजी पहुंचे तो देखा प्रभु के सामने भोग की थाली रखी है और वह प्रतीक्षा में बैठे हैं. नारदजी ने श्रीकृष्ण से कहा- भगवन् भोग ठण्डा हो रहा है, इसे ग्रहण क्यों नहीं करते. . श्रीकृष्ण बोले- नारदजी, बिना अतिथि को भोजन कराए कैसे ग्रहण करूं. नारदजी ने सोचा कि प्रभु को अतिथि की प्रतीक्षा में विलंब हो रहा है. इसलिए बोले- प्रभु मैं स्वयं बुला लाता हूं आपके अतिथि को. . नारदजी भी अतिथिशाला की ओर चल पड़े. वहां पहुंचे तो देखा अर्जुन सो रहे हैं. उनके रोम- रोम से श्रीकृष्ण नाम की ध्वनि सुनकर देवी रूक्मिणी आनंद विभोर ताली बजा रही हैं. प्रभुनाम के रस में विभोर नारदजी ने वीणा बजानी शुरू कर दी. . सत्यभामाजी प्रभु के पास पहुंची. प्रभु तो प्रतीक्षा में बैठे हैं. सत्यभामाजी ने कहा- प्रभु भोग ठण्डा हो रहा है प्रारंभ तो करिए. भगवान् ने फिर से वही बात कही- हम अतिथि के बिना भोजन नहीं कर सकते. . अब सत्यभामाजी अतिथि को बुलाने के लिए चलीं. वहां पहुंचकर सोए हुए अर्जुन के रोम-रोम द्वारा किए जा रहे श्रीकृष्ण नाम के कीर्तन, रूक्मिणीजी की ताली, नारदजी की वीणा सुनी तो वह भी भूल गईं कि आखिर किस लिए आई थीं. . सत्यभामाजी ने तो आनंद में भरकर नाचना शुरू कर दिया. प्रभु प्रतीक्षा में ही रहे. जो जाता वह लौट कर ही न आता. . प्रभु को अर्जुन की चिंता हुई सो वह स्वयं चले. प्रभु पहुंचे अतिथिशाला तो देखा कि स्वरलहरी चल रही है. . अर्जुन निद्रावस्था में कीर्तन कर रहे हैं, रूक्मिणी जाग्रत अवस्था में उनका साथ दे रही हैं, नारद जी ने संगीत छेड़ी है तो सत्यभामा नृत्य ही कर रही हैं. . यह देखकर भगवान् के नेत्र सजल हो गये. प्रभु ने अर्जुन के चरण दबाना शुरू कर दिया. . प्रभु के नेत्रों से प्रेमाश्रुओ की कुछ बूंदें अर्जुन के चरणों पर पड़ी तो अर्जुन वेदना से छटपटा कर उठ बैठे. जो देखा उसे देखकर हतप्रभ तो होना ही था. घबराए अर्जुन ने पूछा- प्रभु यह क्या हो रहा है ! . भगवान् बोले- अर्जुन तुमने मुझे रोम-रोम में बसा रखा है इसीलिए तो तुम मुझे सबसे अधिक प्रिय हो. गोविन्द ने अर्जुन को गले से लगा लिया. अर्जुन के नेत्रों से अश्रु की धारा फूंट रही थी. . कुछ बूंदें सौभाग्य की, कुछ प्रेम की और कुछ उस अभिमान की जो भक्त को भगवान् के लिए हो ही जाती है. . कुछ कथाएं तब उमड़ती है जब भक्त अपने आराध्य की भक्ति में लीन हो जाता है. वह कथाएं सभी दूसरी कथाओं से ज्यादा आनंद प्रदान करती है. . बोलिये भक्त की जय, भक्तवत्सल भगवान् की जय। ((((((( जय जय श्री राधे )))))))

Realme X2 Pro और Realme 5s आज होंगे भारत में लॉन्च, यहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग

Realme X2 Pro, Realme 5s Launch Today: रियलमी एक्स2 प्रो और रियलमी 5एस दोनों ही स्मार्टफोन आज भारत में लॉन्च किए जाएंगे। इन दोनों में Realme X2 Pro प्रीमियम वेरिएंट हैं और इसे पिछले माह चीनी मार्केट में लॉन्च किया जा चुका है। लेकिन रियलमी 5एस आज भारत में लॉन्च होगा लेकिन आधिकारिक लॉन्च से पहले सामने आए टीज़र से डिस्प्ले, प्रोसेसर, कैमरा आदि की जानकारी सामने आ चुकी है। अहम खासियतों की बात करें तो Realme का आगामी फ्लैगशिप फोन रियलमी एक्स2 प्रो में स्नैपड्रैगन 855+ प्रोसेसर, 90 हर्ट्ज़ फ्लूइड डिस्प्ले, चार रियर कैमरे और इसमें 64 मेगापिक्सल का कैमरा सेंसर के अलावा 50 वॉट सुपर वूक फास्ट चार्जिंग तकनीक होगी। वहीं दूसरी तरफ Realme 5s में जान फूंकने के लिए 5,000 एमएएच की बैटरी दी जाएगी, इसके अलावा फोन के पिछले हिस्से में चार रियर कैमरे मिलेंगे।

Realme X2 Pro, Realme 5s Live Stream डिटेल्स

रियलमी एक्स2 प्रो और रियलमी 5एस का लॉन्च इवेंट दोपहर 12:30 बजे शुरू होगा। लॉन्च इवेंट नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा और इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग YouTube चैनल पर होगी। Realme के फ्लैगशिप फोन की ब्लाइंड ऑर्डर सेल दो दिनों तक कंपनी की आधिकारिक साइट पर लाइव भी रही थी, इस दौरान ग्राहकों के पास 1,000 रुपये का भुगतान कर रियलमी एक्स2 प्रो को ऑर्डर करने का मौका था। इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब चैनल पर होगी और हमने आपकी सुविधा के लिए खबर के बीच में वीडियो लिंक को ऐम्बेड किया है।

Realme X2 Pro और Realme 5s आज होंगे भारत में लॉन्च, यहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग

Realme X2 Pro price in India (उम्मीद)

रियलमी एक्स2 प्रो की भारत में कीमत से पर्दा तो आज इवेंट के दौरान ही उठेगा लेकिन ऐसा अनुमान है कि स्मार्टफोन की कीमत चीनी मार्केट में लॉन्च किए गए रियलमी एक्स2 प्रो की कीमत के आसपास हो सकती है। चीनी मार्केट में Realme X2 Pro के 6 जीबी रैम + 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 2,699 चीनी युआन (लगभग 27,200 रुपये) है।

इसके 8 जीबी रैम + 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 2,899 चीनी युआन (लगभग 29,200 रुपये) और 12 जीबी रैम+ 256 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 3,299 चीनी युआन (लगभग 33,200 रुपये) है। तीनों ही वेरिएंट ग्रेडिएंट फिनिश के साथ व्हाइट और ब्लू कलर वेरिएंट में आते हैं। देखने वाली बात यह भी होगी कि क्या कंपनी सभी वेरिएंट को भारतीय मार्केट में लॉन्च करती है या नहीं।

Realme 5s की कीमत भारत में Realme 5 और Realme 5 Pro के बीच हो सकती है। रियलमी 5 की तरह रियलमी 5एस में भी समान प्रोसेसर होगा तो वहीं रियलमी 5 प्रो की तरह रियलमी 5एस में 48 मेगापिक्सल प्राइमरी कैमरा सेंसर के साथ चार रियर कैमरे मिलेंगे।

याद करा दें कि Realme 5 Pro की कीमत भारत में 13,999 रुपये से शुरू होती है। यह दाम 4 जीबी रैम/ 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट का है। इस फोन के 6 जीबी रैम/ 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट का दाम 14,999 रुपये है। स्मार्टफोन का सबसे पावरफुल वेरिएंट 8 जीबी रैम/ 128 जीबी स्टोरेज के साथ आएगा। इसे 16,999 रुपये है।

अब बात रियलमी 5 के दाम की। इसकी कीमत 9,999 रुपये से शुरू होती है। इस दाम में रियलमी 5 का 3 जीबी रैम और 32 जीबी स्टोरेज वेरिएंट मिलेगा। फोन के 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट को 10,999 रुपये में बेचा जाएगा। स्मार्टफोन के 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट का दाम 11,999 रुपये है। ऐसा अनुमान है कि Realme 5s की भारत में कीमत रियलमी 5 प्रो से कम और रियलमी 5 से ज्यादा हो सकती है।

Realme X2 Pro specifications

डुअल-सिम (नैनो) वाला रियलमी एक्स2 प्रो एंड्रॉयड 9 पाई पर आधारित कलरओएस 6.1 पर चलता है। इसमें 6.5 इंच का फुल-एचडी (1080×2400 पिक्सल) सुपर एमोलेड फ्लूइड डिस्प्ले है। इसका आस्पेक्ट रेशियो 20:9, रिफ्रेश रेट 90 हर्ट्ज़ और सैंपलिंग रेट 135 हर्ट्ज है। डिस्प्ले पैनल डीसी डिमिंग 2.0 तकनीक सपोर्ट के साथ आता है।

स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो 91.7 प्रतिशत है और स्क्रीन प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का इस्तेमाल किया गया है। सिक्योरिटी के लिए हैंडसेट में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए फोन में ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 855+ प्रोसेसर के साथ 6 जीबी, 8 जीबी और 12 जीबी रैम है।

अब बात कैमरा सेटअप की। Realme X2 Pro के पिछले हिस्से में चार रियर कैमरे होंगे, इसमें 64 मेगापिक्सल का Samsung GW1 प्राइमरी सेंसर, 13 मेगापिक्सल का सेकेंडरी सेंसर, 115 डिग्री अल्ट्रा-वाइड-एंगल लेंस के साथ 8 मेगापिक्सल का सेंसर और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा सेंसर है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16 मेगापिक्सल का Sony IMX471 कैमरा सेंसर है, इसका अपर्चर एफ/2.0 है। आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि फ्रंट कैमरा पोर्ट्रेट शॉट्स सपोर्ट के साथ आता है।

Realme X2 Pro में 64 जीबी (डुअल-चैनल यूएफएस 2.1), 128 जीबी (यूएफएस 3.0) और 256 जीबी (यूएफएस 3.0) स्टोरेज है। कनेक्टिविटी की बात करें तो फोन में 4जी एलटीई, वाई-फाई 802.11एसी, ब्लूटूथ वर्जन5.0, जीपीएस/ ए-जीपीएस, एनएफसी, यूएसबी टाइप-सी और 3.5 मिलीमीटर हेडफोन जैक शामिल है।

एक्सेलेरोमीटर, प्रॉक्सिमिटी सेंसर, एंबियंट लाइट सेंसर और जायरोस्कोप सेंसर फोन का हिस्सा हैं। डॉल्बी एटमॉस और हाई-रेज़ ऑडियो टेक्नोलॉजी सपोर्ट के साथ डुअल स्पीकर्स दिए गए हैं। Realme ब्रांड के इस फोन में 4,000 एमएएच की बैटरी दी गई है जो 50 वॉट सुपर वूक फ्लैश चार्ज सपोर्ट के साथ आती है। यह टेक्नोलॉजी फोन को केवल 35 मिनट में पूरा चार्ज कर देती है। रियलमी एक्स2 प्रो की लंबाई-चौड़ाई की बात करें तो यह 161×75.7×8.7 मिलीमीटर और वज़न 199 ग्राम है।

Realme 5s specifications

जैसा कि नाम से संकेत मिल रहा है कि रियलमी 5 की तुलना में रियलमी 5एस थोड़ा अपग्रेडेड होगा। इस माह के शुरुआत में Realme ने इस बात का खुलासा किया था कि रियलमी 5एस स्मार्टफोन में 6.51 इंच का एचडी+ डिस्प्ले है, फ्रंट पैनल पर वाटरड्रॉप-नॉच है जिसमें सेल्फी कैमरा सेंसर को जगह दी गई है।

जैसा कि हमने एक ऑफिशियल टीज़र में देखा है Realme 5s के पिछले हिस्से में चार रियर कैमरा मिलेगा। रियलमी 5एस में 48 मेगापिक्सल का रियर कैमरा होगा लेकिन यह पिक्सल बाइनिंग तकनीक पर निर्भर करेगा और ब्राइट तस्वीरें कैप्चर करने के लिए 12 मेगापिक्सल रिजॉल्यूशन पर निर्भर करेगा।

बाकी कैमरा सेंसर रियलमी 5 के समान हो सकते हैं, इसका मतलब Realme 5s में 8 मेगापिक्सल का वाइड-एंगल कैमरा सेंसर, 2 मेगापिक्सल मैक्रो कैमरा सेंसर और 2 मेगापिक्सल का पोर्ट्रेट कैमरा सेंसर हो सकता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। अभी तक Realme ब्रांड के इस आगामी स्मार्टफोन का सिंगल रेड कलर वेरिएंट ही सामने आया है लेकिन उम्मीद है कि लॉन्च इवेंट के दौरान अन्य कलर वेरिएंट को भी उतारा जाए।

इसके अलावा रियलमी पहले ही इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि Realme 5s में जान फूंकने के लिए 5,000 एमएएच की बैटरी मिलेगी लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह फास्ट चार्जिंग सपोर्ट से लैस होगी या नहीं। इसके अलावा यह भी पता है कि रियलमी 5एस में स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए स्नैपड्रैगन 665 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया जाएगा। फोन के आधिकारिक रेंडर (ग्राफिक्स से बनी तस्वीरें) से इस बात का चला है कि फोन के पिछले हिस्से में फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है।